धर्म / धर्मदर्शन

सर्वपितृ अमावस्या

B. Rao 2018-10-09 00:56:46


आश्विन माह वर्ष के 12 माहों में खास माना जाता है। इस माह की अमावस्या और तिथि महत्वपूर्ण होती है। इसकk कारण है पितृ पक्ष में अमावस्या का होना। इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या के दिन सोमवती अमावस्या का महासंयोग है जो बहुत भाग्यशाली है।

 

पितृपक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से होता है। आश्विन माह का प्रथम पखवाड़ा जो माह का कृष्ण पक्ष होता है पितृपक्ष के रूप में जाना जाता है। स दिन हिंदू धर्मो के अनुयायी अपने पूर्वजों को स्मरण कर, उन्हें याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए स्नान, दान, तर्पण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धk प्रकट करते हैं। श्रद्धा प्रकट करने के कारण ही इस दिन को श्राद्ध कहते है। विद्वान ब्राह्मणों के अनुसार जिस तिथि को दिवंगत आत्मा संसार छोड कर गई थी उसी तिथि को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। लेकिन कभी-कभी हम जाने-अनजाने में उस तिथि को भूल जाते हैं जिस तिथि को हमारे पूर्वज हमें छोड़ कर गए थे। इसलिए कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानी अमावस्या को समस्त पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

इस अमावस्या के है कई महत्व

इस अमावस्या में श्राद्ध करने की यह मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम की धूप देने से मानसिक शारीरिक तौर पर संतुष्टि  और  शांति की प्राप्तh होती है] घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैंA प्रत्येक माह की अमावस्या में पिंडदान किया जाता है लेकिन आश्विन अमावस्या विशेष रूप से शुभ फलदायी मानी जाती है। पितृ अमावस्या होने के कारण इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस अमावस्या में  पितृ अपने प्रियजनों के द्वार पर श्राद्धादि की इच्छा लेकर आते हैं।

यदि उन्हें पिंडदान दें तो वह श्राप देकर चले जाते हैं जिससे सुख-समृद्धि में कमी कार्य भी बिगड़ने लगते हैं। इसलिए श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए।