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जबलपुर के रांझी थाना अंतर्गत छठवीं बटालियन से पकड़े दो आरोपियो से शुरू हुई फर्जीवाड़े के खुलासे की कड़ी अब बेहद लंबी हो चुली है।

B. Rao 2018-10-04 16:15:14


घोटालो के लिए बदनाम हो चुका प्रदेष मानो कीर्तिमान बनाने की राह पर चल पड़ा है। 2017 मे जबलपुर के रांझी थाना अंतर्गत छठवीं बटालियन से पकड़े दो आरोपियो से शुरू हुई फर्जीवाड़े के खुलासे की कड़ी अब बेहद लंबी हो चुली है। मामले की जाॅच अब एसटीएफ संभाल रही है जिसने प्रथमिक जाॅच मे ही बड़े रैकेट का खुलासा किया है। इस पूरे फर्जीवाड़े मे दिल्ली की एक कोचिंग संस्थान ,,व्यापम के कुछ अधिकारी और उत्तरप्रदेष के स्कोरर का हाथ है।

प्रदेष मे डाॅक्टर से लेकर आरक्षक बनने तक बेहद शाॅर्ट कट रास्ता फर्जीवाड़े से होकर गुजरता है जिसे लाख प्रयासो के बावजूद अब तक रोका नही जा सका है। पीएमटी फर्जीवाड़ा हो या व्यापम फर्जीवाड़ा या फिर ताजा आरक्षक भर्ती घोटाला। तीनो ही अलग अलग मामलो मे भ्रष्ट तंत्र ,,,कुछ स्कोरर और अतर्राज्जीय गिरोह का होना आम है। जबलपुर मे रांझी स्थित छठवीं बटालियन मे पकड़े गए मुन्नाभाईयो ने पूरे गिरोह का ख्ुालासा किया था। मामले मे अब तक मनीष पाण्डे, योगेष गुर्जर , राहुल गुर्जर और राहुल पाण्डे गिरफ्तार हो चके है। गुना निवासी योगेष और राहुल गुर्जर के स्थान पर आगरा निवासी मनीष पाण्डे और राहुल पाण्डे परीक्षा दे रहे थे। खास बात ये रही कि सिस्टम को मात देकर बड़ी ही आसानी से फाॅर्म भरने से लेकर लिखित परीक्षा तक सारे परीक्षा स्तर को फर्जी ढ़ंग से पास कर लिया गया था लेकिन फिज़िकल एग्ज़ाम मे पकड़े गए। इस बात से स्पष्ट होता है कि व्यापम का मैनेजमेंट भी इस फर्जी गिरोह के कब्ज़े मे रहा। एसटीएफ ने अपनी जाॅच मे भी ये पाया है कि फर्जी तरीके से भर्ती अभयर्थियो के फाॅर्मो के साथ कूटरचना की गई। एसटीएफ ने बताया कि 2015 से अब तक हुई आरक्षक भर्ती ,, एसआई ,,एसएएफ भर्ती परीक्षाएं जाॅच के दायरे मे है।