धर्म / आस्था

श्राद्ध कर्म

B. Rao 2018-09-30 18:48:15


पितरों के तर्पण के लिए भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृ पक्ष कहे जाते हैं। इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए पूजा-पाठ कराया जाता है। इस बार 24 सितंबर से 9 अक्तूबर तक श्राद्ध रहेंगे।

-श्राद्ध कर्म करते समय 11.06 से 12.24 बजे तक का समय उत्तम माना गया है।

-गया, पुष्कर, प्रयाग और हरिद्वार में श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l

-गौशाला में, देवालय में और नदी तट पर श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l

-सोना, चांदी, तांबा और कांसे के बर्तन में अथवा पलाश के पत्तल में भोजन करना-कराना अति उत्तम माना गया है l लोहा, मिटटी आदि के बर्तन काम में नहीं लाने चाहिए l

-श्राद्ध के समय अक्रोध रहना, जल्दबाजी करना और बड़े लोगों को या बहुत लोगों को श्राद्ध में सम्मिलित नहीं करना चाहिए।

-श्राद्ध सद्भावना और सत उद्देश्य से श्राद्ध करना चाहिए, कि दिखावे के उद्देश्य से।

-सफ़ेद सुगन्धित पुष्प श्राद्ध कर्म में काम में लाने चाहिएं l लाल, काले फूलों का त्याग करना चाहिए l

-अति मादक गंध अथवा सुगंध हीन फूल भी श्राद्ध कर्म में काम में नहीं लाना चाहिए।