धर्म / आस्था

सिर्फ चौदह दिनों का है पितृ पक्ष

B. Rao 2018-09-25 23:34:09


हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण प्रमुख माने गए हैं, इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा पूर्वज सम्मिलित हैं। पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में मृत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है, परंतु 'गया श्राद्ध' का विशेष महत्व है। 

यूं तो पितृपक्ष 15 दिनों का होता है लेकिन इस बार षष्ठी तिथि का क्षय होने से श्राद्ध पक्ष 14 दिनों का है। पितृपक्ष मंगलवार से शुरू शुरू होकर 8 अक्टूबर तक होगा। वैदिक शोध एवं सांस्कृतिक प्रतिष्ठान कर्मकांड प्रशिक्षण केंद्र के आचार्य डॉ. आत्माराम गौतम ने बताया कि भारतीय संस्कृति में आश्विन मास का कृष्ण पक्ष पितरों को समर्पित है। वाल्मीकि रामायण में सीता द्वारा पिंडदान देने से दशरथ की आत्मा को मोक्ष मिलने का संदर्भ आता है। अपने वनवास काल में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध करने के लिए 'गया धाम' गए थे।

श्रद्धापूर्वक श्राद्ध किए जाने से पितर वर्षभर तृप्त रहते हैं और उनकी प्रसन्नता से वंशजों को दीर्घायु, संतति, धन, विद्या, सुख एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि मार्कण्डेय और वायु पुराण में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में पूर्वजों के श्राद्ध से विमुख नहीं होना चाहिए लेकिन व्यक्ति सामर्थ्य के अनुसार ही श्राद्ध कर्म करे।