धर्म / व्रत त्यौहार

विश्वकर्मा पूजा

B. Rao 2018-09-17 00:59:16


विश्वकर्मा पूजा का त्योहार हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है. इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है. इस बार सितंबर सोमवार को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन कल कारखानों में मशीनों की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन विश्वकर्मा भगवान की पूजा की जाती है और उनसे कारोबार में उन्नति का वरदान मांगा जाता है. दरअसल, भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है और यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा के दिन उद्योगों और फेक्ट्रियों में मशीनों की पूजा की जाती है.

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ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सतयुग के स्वर्ग लोक, श्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग की हस्तिनापुर की रचना की. यहां तक कि सुदामापुरी का निर्माण भी उन्होंने ही किया. ऐसे में यह पूजा उन लोगों के ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और व्यापारी हैं. इस त्योहार के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे देश के कई हिस्सों में दीपावली के दूसरे दिन भी मनाया जाता है.

विश्वकर्मा जी की आरतीः

जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ जय

आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ जय

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ जय

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥ जय

जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ जय

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ जय

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ जय

श्री विश्वकर्मा जीकी आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥ जय