ज्योतिष / रत्नविज्ञान

रत्न विज्ञान

B. Rao 2018-09-12 22:43:57


ज्योतिष विद्या

ज्योतिष विद्या के अंतर्गत रत्न विज्ञान को बड़ी प्रमुखता के साथ अपनाया गया है। कुंडली में अगर कोई ग्रह शुभ नहीं है तो उसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिषशास्त्री एक विशिष्ट रत्न, जिसका संबंध उसी ग्रह से होता है, पहनने की सलाह देते हैं।

शुभ स्थिति

इसके अलावा अगर कोई ग्रह शुभ स्थिति में बैठे होने के बावजूद कमजोर पड़ा हुआ है तो जातक उसके शुभ प्रभाव से वंचित रह जाता है। ऐसे में रत्न विज्ञान की सहायता से संबंधित ग्रह को मजबूत बानाया जाता है ताकि वह अपने पूर्ण प्रभाव के साथ जातक के जीवन को प्रभावित करे।

रत्न

लेकिन ऐसे कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना होता है। मसलन रत्न का भार तय करना, रत्न को सही मंत्र उच्चारण के साथ, सही दिन और समय धारण करना और इसके अलावा इस बात का ध्यान भी विशेष रूप से रखा जाता है कि कहीं उस ग्रह को प्रभावी बनाने के चक्कर में अन्य शुभ ग्रह तो प्रभावित नहीं हो रहे या फिर संबंधित ग्रह को कमजोर करने का खामियाजा तो नहीं भुगतना पड़ेगा।

रत्न की शुद्धता

इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण चीज है वह है रत्न की शुद्धता। आजकल का जमाना बाजारवाद से ग्रसित है, धन कमाने के सामने ईमानदारी की कोई कीमत नहीं रह गई है। इसलिए रत्न बेचने वाले पत्थर को रत्न बताकर बेचना शुरू कर चुके हैं।


रत्न विज्ञान

इस चक्कर में परेशानी से बचने के लिए लोग पैसा खर्च करके रत्न तो पहन लेते हैं लेकिन उसके असर से वंचित रह जाने के कारण अपने जीवन में कोई सुधार नहीं देख पाते। ऐसे में वो रत्न विज्ञान को ही बेमानी मान लेते हैं।

रत्न की जांच

इसलिए खुद रत्न की जांच करने के अलावा आपके पास और कोई चारा नहीं बचता। इसलिए आज हम आपको 9 प्रमुख और महंगे रत्नों की शुद्धता की जांच कैसे करें, इसके विषय में बताने जा रहे हैं।