धर्म / व्रत त्यौहार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

B. Rao 2018-09-02 00:00:45


प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। लेकिन इस बार जन्माष्टमी को लेकर जनमानस में कुछ संशय है। संशय के पीछे मूल कारण है अष्टमी तिथि का दो दिन रहना। इस बार अष्टमी तिथि 2 एवं 3 सितंबर को रहेगी, जिसके चलते श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मनाए जाने को लेकर विद्वानों में मतभेद है।

कुछ विद्वान रात्रिकालीन अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र को मान्यता दे रहे हैं, वहीं कुछ विद्वान सूर्योदयकालीन अष्टमी तिथि को मान्यता दे रहे हैं। इस मतान्तर के कारण आम श्रद्धालुगण असमंजस में हैं कि आखिर वे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव किस दिन मनाएं?

शास्त्रानुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में रात्रि के 12 बजे हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। अत: भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव के दिन रात्रि में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र का होना अनिवार्य है।

इस वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि 2 एवं 3 सितंबर दोनों ही दिन रहेगी। इस वर्ष 2 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 46 मिनट से अष्टमी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा एवं 3 सितंबर को अष्टमी तिथि 7 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ 2 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से होगा एवं 3 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 8 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र समाप्त होगा। अत: रात्रि के 12 बजे केवल 2 सितंबर को ही अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र रहेगा।