धर्म / पूजाविधि

शिव को प्रिय है सावन माह

B. Rao 2018-08-09 14:57:39


पौराणिक मान्यताआें के अनुसार  सावन का प्रारंभ होते ही भगवान शिव जाग्रत हो जाते हैं आैर माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक का सारा कार्यभार संभाल लेते हैं। इसलिए सावन का महीना शिव के लिए बेहद खास होता है। इसी लिए इस माह में उनकी पूजा का महत्व भी बढ़ जाता है। 

प्रचलित कथायें 

सावन के महीने में भगवान शिव जी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। यहीं कारण है कि इस महीने को शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है। इसी के चलते ही सावन का महीना शिव जी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही सावन का महीना शिव जी का प्रिय होने की आैर भी वजह हैं। जैसे इस महीने में सबसे ज्यादा वर्षा होती है और अधिक वर्षा होने से  विष से तप्त हुर्इ शिवजी की देह को ठंडक प्राप्त होती है। इसके अलावा आैर भी कर्इ पौराणिक कथाआें में ये जिक्र आता है कि सावन में शिव जी कामहत्व क्यूं है आैर उन्हें यह माह इतना प्रिय क्यों हैं। कहते हैं कि अपनी विष तप्त देह से जुड़ी कहानियों का जिक्र करते हुए भगवान शंकर ने स्वयं सनतकुमारों को सावन महीने की महिमा बताई आैर कहा कि उनके तीनों नेत्रों में से सूर्य दाहिने में, बांए में चन्द्र और मध्य नेत्र में अग्नि है।

 इसी तरह सावन महीने के बारे में सबसे प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार बताते हैं कि देवी सती ने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से शरीर त्यागने से पूर्व शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। इसीलिए उन्होंने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में भगवान शिव जी की पूजा की और सावन के महीने में कठोर तप किया आैर उन्हें शिवजी की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। तभी से ये महीना शिव जी का प्रिय हो गया। यही कारण है कि अन् पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि सावन से प्रारंभ कर सोलह सोमवार के व्रत करने से कन्याओं को सुंदर पति मिलते हैं तथा पुरुषों को सुंदर पत्नियां मिलती हैं।