धर्म / पूजाविधि

कामिका एकादशी की पूजा और व्रत कथा

B. Rao 2018-08-08 15:54:48


सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत उपवास करके भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। इस दिन प्रात: काल उठ कर भगवान श्री कृष्ण को जल चढ़ायें और उन्हें तुलसी दल और उसकी मंजरी अर्पित करें। भगवान के सामने घी के दीपक प्रज्वलित करें। भगवान को पंचामृत से स्नान करायें और धूप, दीप, चंदन आदि सुगंधित पदार्थों से उनकी आरती उतारें। कामिका एकादशी के दिन पूजा के बाद इसकी कथा का श्रवण करें और पूरे दिन फलाहार करके व्रत करेंवैसे तो दशमी के दिन से ही सूर्यास्त के पहले भोजन करने के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए और कामिका एकादशी के व्रत का संकल्प मन में ले  लेना चाहिए। अगले दिन प्रात: काल उठकर भगवान की पूजा करनी चाहिए और व्रत का करते हुए एकादशी की रात को जागरण करना चाहिए। एकादशी के दिन जागरण करना भी व्रत का ही एक अंग माना जाता है

 

व्रत कथा 

पौरणिक कथाओं के अनुसार एक बार युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु श्रावण के कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है ऐसा क्यों, इसकी कथा का वर्णन करने की कृपा करें। तब श्री कृष्ण ने उन्हें ये कथा सुनाई। एक नगर में एक श्रेष्ठ ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं थी। आपसी झगड़े के कारण ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला। बाद में जब उसने ब्राह्मण की तेरहवीं करनी चाही तो नाराज ब्राह्मणों ने उसके घर खाना खाने से मना कर दिया और ठाकुर अकेला पड़ गया। उसके मन में अपने कृत्य के लिए ग्लानि भी पैदा हुई और वह खुद को दोषी मानने लगा। तब उसने एक साधु से अपने पापों का निवारण करने का तरीका पूछा, तब साधु ने उसे कमिका एकदशी का उपवास करने के लिए कहा। उसकी सलाह पर ठाकुर ने व्रत करना शुरू कर दिया। एक बार