बिज़नेस / अर्थव्यस्था

स्काइमेट ने घटाया मानसून का अनुमान, आर्थिक चिंताएं बढ़ी

B. Rao 2018-08-01 17:56:15


स्काइमेट ने घटाया मानसून का अनुमान, आर्थिक चिंताएं  बढ़ी

 वर्ष 2018 के लिए मानसून से होने वाली बारिश का अनुमान घटाए जाने के बाद कृषि उत्पादन और एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के ग्रोथ रेट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।भारत की करीब आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए मानसून पर आश्रित है। निजी एजेंसी स्काइमेट ने बुधवार को बताया कि भारत में वर्ष 2018 के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मानसून भारत में होने वाली कुल बारिश का करीब 70 फीसद है जो कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जाती है।भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी करीब 14 फीसद है, हालांकि इसमें देश की आधे से अधिक आबादी लगी हुई है।कम बारिश होने की स्थिति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रफ्तार को झटका लग सकता है और इससे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी जो कि सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) में करीब आधे से अधिक की हिस्सेदारी रखता है।महंगाई बढ़ने की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से ब्याज दरों में इजाफा किए जाने की संभावना बनी रहती है। स्काइमेट की तरफ से बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि जून-सितंबर के बीच भारत में सामान्य सालाना मानसूनी बारिश का दीर्घावधि औसत (एलपीए) 92 फीसद रहने की उम्मीद है, जो कि पहले 100 फीसद था।यदि एलपीए का 96-104 फीसद तक बारिश होती है, तो उसे सामान्य माना जाता है जबकि 90 फीसद से नीचे को कम मानसून और 90-96 फीसद को सामान्य से कम माना जाता है।गौरतलब है कि भारत के करीब 26 करोड़ किसान धान, गन्ना, कपास और सोयाबीन समेत अन्य फसलों के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कम बारिश से किसानों की आय प्रभावित होगी और इससे मांग पर असर होगा।